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रेलवे संरक्षा आयोग का नागरिक चार्टर

1.  संग न का परिचय:

 रेल संरक्षा आयोग, जो भारत सरकार के नागर विमानन मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के अंतर्गत है, रेल यात्रा तथ रेल परिचालन मेँ संरक्षा मामलों से सम्बंधित है तथा रेल अधिनियम (1989) मे दिए गये सांविधिक कार्यो को करता है, ये कार्य निरीक्षणात्मक, जाॅच सम्बंधी तथा परामर्शी प्रकृति के हैं। आयोग, रेल अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों अर्थात दुर्घटना नियमो के अंतर्गत सांविधिक जाॅच तथा समय-समय पर जारी किए गए कार्यकारी अनुदेशों के अनुसार कार्य करता है। आयोग का सबसे महत्वपूर्ण कार्य यात्री यातायात के लिए खोली जाने वाली किसी भी नई लाइन के लिए रेल मंत्रालय द्वारा निर्धारित मानकों तथा विनिर्देशो का पालन तथा यात्री यातायात को चलाने के लिए नई लाइनें सभी तरह से सुरक्षित हैै, को सुनिश्चित करना है। यह अन्य कार्यो जैसे गेज परिवर्तन, दोहरी लाइनों तथा विद्यमान लाइनों के विद्युतीकरण पर भी लागू होता है। आयोग भारतीय रेलों मे घटने वाली गम्भीर प्रकृति की रेल दुर्घटनाओं की सांविधिक जाॅच करता है तथा भारत मे रेल संरक्षा से संबंधित सुधार के लिए सिफारिशें करता है।

2.  सेवा एवं कर्तव्य:

2.1   रेल अधिनियम 1989 के अध्याय III के अनुसार रेल संरक्षा आयुक्त के कर्तव्य इस प्रकार हैं:-

  • नई रेल लाइनों का निरीक्षण यह निर्धारित करने के लिए करना कि क्या ये रेल लाइनें यात्रियों के सार्वजनिक वहन के निमित्त खोले जाने के उपयुक्त है तथा जैसा कि अधिनियम के द्वारा या अधीन अपेक्षित है, केन्द्रीय सरकार को इस विषय मेँ रिपोर्ट देना।

     

  • केन्द्रीय सरकार के निर्देशानुसार किसी रेलवे अथवा उस पर प्रयोग होने वाले किसी चल स्टाक का आवाधिक अथवा अन्य निरीक्षण करना।

     

  • रेलवे में किसी भी दुर्घटना के कारणों की इस अधिनियम के अधीन जाॅच करना, इस अधिनियम या उसके द्वारा उनको सौपे गए इसी प्रकार के अन्य कर्तव्यों का निष्पादन।

     

2.2   अधिनियम की धारा 22 से 24 में इसी प्रकार के अन्य कर्तव्यों जैसे शब्द का उल्लेख किया गया है, जिनमे निम्नलिखित सम्मिलित हैं -

  • केन्द्र सरकार की ओर से निरीक्षण करने के पश्चात नई रेल लाइनों को खोलने की स्वीकृति देना।

     

  • चालू लाइनों की संरक्षा को प्रभावित करने वाले नए निर्माण कार्य सहित सभी तरह के निर्माण कार्यों को निष्पादित करने की मंजूरी देना।

     

  • जब किसी चालू लाइन या प्राधिकृत चल स्टाक के निरीक्षण के पश्चात आयुक्त का यह मत है कि उसका निरन्तर प्रयोग यात्रियों के लिए खतरनाक होगा तो वह (आयुक्त) अपने अभिमत केन्द्र सरकार को भेज सकता हैै और तब केन्द्र सरकार उस लाइन को बन्द करने या चल स्टाक का प्रयोग रोक देने का आदेश दे सकती है तथा

     

     

  • इस प्रकार की बन्द लाइनों के निरीक्षण के पश्चात, उसे यात्रियों के लिए पुनः चालू करने की मंजूरी तथा रोक दिए गए चल स्टाक को प्रयोग के लिए उपयुक्त दशा मेँ पुनः चालू करने की भी रिपोर्ट केन्द्र सरकार को देना।

     

2.3   रेलवे सुरक्षा मुख्य आयुक्त इस संग न के क्रियाकलापों का निर्देशन करता है और रेल संरक्षा से सम्बंधित सभी मामलों में जैसे, अधिकारियों की भर्ती, तैनाती और पदोन्नति, बजट और व्यय आदि के बारे मे केंद्रीय सरकार को परामर्श देने के लिए उत्तरदायी है।मुख्य आयुक्त मुख्यत: निम्न कार्य करतें हैं :-

  • क्षेत्रीय निरीक्षणों मेँ दुर्घटनाओं की सांविधिक जाॅचों से सम्बंधित मामलें।
  • रेल संरक्षा आयुक्तों की निरीक्षण रिपोर्ट।

     

  • आयुक्तों द्वारा दुर्घटनाओं पर की गई सांविधिक जाॅचों की रिपोर्टाे का सावधानीपूर्वक अध्ययन कर अपना सुविचारित मत आवश्यक संस्तुतियों सहित नियंत्रक मंत्रालय तथा रेलवे बोर्ड को भेजता है।

     

  • सामान्य नियमों, नये रेल मार्ग खोलने के नियमों, आयामों की अनुसूचियों, रेल मार्ग, पुल तथा सिगनल इंजीनियरी मैनुअलों, दुर्घटनाओं की जाॅच प्रक्रियाओं, इंजीनियरी कार्य के लिए आचार संहिताओं और अन्य प्रकाशनों से संबंधित शुद्धियों तथा संशोधन के बारे में रेलवे बोर्ड के प्रस्तावों पर विचार।

     

  • रेल संरक्षा आयोग के क्रियाकलापों के विषय कें वार्षिक रिपोर्ट तैयार करना तथा संसद के प्रत्येक सदन मे रखना।

     

  • रेलवे बोर्ड द्वारा समय-समय पर जारी किए गए आदेशों  को सम्मिलित करते हुए उल्लखित पैरा में दर्शाये गए समस्त तकनीकी प्रकाशन करना।

     

 
 
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